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जनगणना – 2027

भारत में जनसंख्या जनगणना एक केंद्रीय विषय (अनुच्छेद 240) है और संविधान की सातवीं अनुसूची में क्रमांक 69 पर सूचीबद्ध है। जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990, समय-समय पर संशोधित रूप में, भारत में जनगणना के संचालन का कानूनी आधार हैं। “जनगणना” शब्द को सामान्यतः “जनसंख्या जनगणना” के रूप में समझा जाता है। भारत की जनगणना जनसंख्या, आवास और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर पूर्ण और व्यापक डेटा एकत्र करने का सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी प्रशासनिक अभ्यास है। भारत में 1872 से नियमित रूप से दस-वर्षीय जनसंख्या जनगणना आयोजित करने की एक लंबी परंपरा रही है। सबसे हालिया जनगणना 2011 में आयोजित की गई थी, जबकि 2021 में निर्धारित जनगणना को कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया था। जनगणना 2027, 1872 से निरंतर श्रृंखला में 10वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद से 8वीं जनगणना होगी, जो डेटा-आधारित शासन और समावेशी विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत में जनसंख्या जनगणना आयोजित करने की मंशा को केंद्र सरकार द्वारा 18 जून 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था।

जनगणना के चरण:

चरण 1: मकानों की सूची और आवास जनगणना (राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चुने गए अनुसार अप्रैल-सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की निरंतर अवधि में आयोजित की जाएगी) आवास की स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों से संबंधित आंकड़ों का स्रोत

चरण 2: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027 में पूरे भारत में आयोजित की जाएगी। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपातग्रस्त क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के लिए सितंबर 2028 में आयोजित की जाएगी) जनसांख्यिकीय विशेषताओं, साक्षरता, श्रमिक प्रवासन और प्रजनन दर से संबंधित आंकड़ों का स्रोत