डा0 भीमराव अम्बेडकर श्रमिक सुविधा योजना (लेबर अडडा)
विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य में लगे
श्रमिक तथा विभिन्न श्रेणी के दिहाड़ी श्रमिक कार्य की तलाश में प्रतिदिन नगरीय क्षेत्रों मे ं आकर वहाँ के
विभिन्न चैराहों एवं अन्य स्थलों पर एकत्रित होते हैं। ऐसे स्थल सामान्यतः गन्दे रहते है और इस प्रकार
प्रतिदिन उनके एकत्रित होने से सार्वजिनक स्थल पर अनावश्यक भीड़ की स्थिति बनी रहती है, जिससे
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर अवरोध उत्पन्न होता है। साथ ही कामगारों के मानसिक एवं शारीरिक
स्वास्थय पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार दिहाड़ी श्रमिकों को दैनिक रूप से कार्यध्रोजगार की
तलाश में नगरीय क्षेत्र के एक भीड़भाड़ वाले ऐसे स्थल पर एकत्र होते हैं जहाँ उन्हे ं मूलभूत सुविधायें नही
मिल पाती। यह स्थिति मानवीय दृष्टिकोण से उचित नही है तथा इसका मानव व श्रम विकास तथा
उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ता है। इस स्थिति में सुध् ार के लिये दिहाड़ी श्रमिकों को रोजगार की
तलाश में प्रतीक्ष् ा एवं विश्राम हेतु एक स्वच्छ व मूलभूत सुविध् ाओं से युक्त स्थल उपलब्ध कराया जाना
आवश्यक है।
संरचना-
1. भूतल पर मूलभूत सुविध् ाओं युक्त प्रतीक्ष् ालय एवं विश्राम स्थल।
2. प्रथम तल सामुादियक रसोर्ठ/रियायती दर कैन्टीन।
3.द्वितीय तल पर जन सेवा केन्द्र/कौषल विकास केन्द्र/हेल्प डेस्क।
पात्रता-
1. भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकः (बीओसी डब्ल्यू) अधिनियम के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिक।
2. अंतरराज्यीय और अंतरजनपदीय प्रवासी श्रमिक।
3. विभिन्न क्षेत्रों व विभिन्न कार्यों में लगे दिहाड़ी श्रमिक।
4. रोजगार स्वरोजगार की तलाश में आये श्रमिक/व्यक्ति ।
5. ऑफ-सीजन अवधि के दौरान मौसमी श्रमिक व कृषि श्रमिक।
सुविधा-
1. असंगाठित श्रमिकों के मूलभूल एवं बुनियादी सुविधाओं से युक्त प्रतीक्षा स्ािल उपलब्ध कराना है।