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ट्रांसजेंडर कल्याण

ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की जड़ें राष्ट्रीय स्तर पर 2014 में सुप्रीम कोर्ट के छ।स्ै। बनाम भारत सरकार फैसले से जुड़ी हैं, जिसमें ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी गई। उत्तर प्रदेश में इसकी औपचारिक शुरुआत 2021 में हुई, जब राज्य सरकार ने ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड का गठन किया। 2023 में विशिष्ट पहचान पत्र (आईडी कार्ड) जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके तहत आई.डी. कार्ड जारी किये जा रहे हैं। यह राज्य के 75 जिलों में लगभग 1,37,465 ट्रांसजेंडरों को कवर करता है, जो 2011 की जनगणना पर आधारित है। योजना भारत सरकार की स्माइल (सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज) योजना से जुड़ी हुई है।

उद्देश्य:

योजना का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के व्यक्तियों की पहचान स्थापित कर उन्हें संवैधानिक अधिकार दिलाना, जीविकोपार्जन के अवसर प्रदान करना तथा समाज की मुख्यधारा में उनका समावेश सुनिश्चित करना है। इससे सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर आर्थिक स्वावलंबन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बढ़ावा दिया जाता है।

योजना के लाभ:

  • पहचान पत्र (आईडी कार्ड)ः- सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक है।
  •  पेंशनः- 60 वर्ष से अधिक आयु के ट्रांसजेंडरों को मासिक पेंशन।
  •  वृद्धाश्रम सुविधाः- 60 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए मुफ्त आवास, भोजन, स्वास्थ्य जांच एवं मानसिक परामर्श।
  •  छात्रवृत्तिः- ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता
  •  कौशल विकास एवं रोजगारः- स्माइल योजना के तहत प्रशिक्षण, मुख्यमंत्री उद्यमी विकास अभियान से जुड़ाव, तथा गरिमा गृह में पुनर्वास।
  •  अन्यः- राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं एवं सामाजिक सुरक्षा। ये लाभ समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हैं।

योजना हेतु पात्रता

मानदंड विवरण
आयु आईडी कार्ड के लिए कोई सीमा नहीं; पेंशन/वृद्धाश्रम के लिए 60 वर्ष से अधिक।
वर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्ति।
आर्थिक स्थिति किसी भी आय वर्ग का (विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर)।
निवास उत्तर प्रदेश का मूल निवासी।
अन्य चिकित्सा/शपथ पत्र से ट्रांसजेंडर होने का प्रमाण; पूर्व में लाभ न लिया हो।

सम्पर्क अधिकारी- जिला समाज कल्याण अधिकारी, ग़ाज़ियाबाद।
मोबाइल नम्बर- 9151935257
कार्यालय का पता- कक्ष संख्या 110-111, विकास भवन, ग़ाज़ियाबाद।