जनपद के बारे में

जिले का गठन

14 नवंबर 1976 से पहले गाजियाबाद जिला मेरठ की तहसील थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री एन.डी. तिवारी ने 14 नवंबर 1976 को भारत के पहले प्रधान मंत्री, पं जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर गाजियाबाद को जिला के रूप में घोषित किया। तब से गाजियाबाद सामाजिक, आर्थिक, कृषि और व्यक्तिगत मोर्चे पर आगे बढ़ रहा है। जिले का मुख्यालय गाजियाबाद, ग्रैंड ट्रंक रोड पर है, जो हिंडन नदी के एक मील पूर्व में 280 40 ′ उत्तर और 770 25 पूर्व में स्थित है। गाजियाबाद मुख्यालय 19 कि.मी. दिल्ली के पूर्व में और 46 कि.मी. मेरठ के दक्षिण-पश्चिम में सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। अन्य सड़कें उत्तर-पश्चिम से लोनी और बागपत और पूर्व में हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर तक जाती हैं। यहां से दिल्ली, मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुरादाबाद, लखनऊ और अन्य जिलों के लिए भी कुछ समय के अंतराल पर बसें चलती हैं। यह उत्तर रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है जहाँ दिल्ली से कलकत्ता, मुरादाबाद और सहारनपुर तक रेल लाइनें मिलती हैं, जो इसे भारत के कई महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती हैं। गाजियाबाद की सीमा दिल्ली से सटी है, इसलिए यह उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में GATEWAY OF U.P भी कहा जाता है।

गाजीउद्दीननगर से गाजियाबाद तक

यह माना जाता है कि इस जगह की स्थापना 1740 में वज़ीर गाज़ी-उद-दीन द्वारा की गई थी, जिन्होंने इसे गाजीउद्दीननगर कहा था। रेलवे लाइन खुलने के बाद जगह का नाम छोटा कर गाजियाबाद कर दिया गया।
जनपद गाजियाबाद मेरठ मण्डल के 6 जिलों तथा उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक जनपदों में से एक है। 14 नवम्बर 1976 के पूर्व जनपद गाजियाबाद जनपद मेरठ के अंतर्गत एक तहसील के रूप में जाना जाता था । उ0प्र0 सरकार ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं0 जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिन के अवसर पर 14 नवम्बर सन् 1976 को गाजियाबाद को जिले का गौरव प्रदान किया। जिले ने सामाजिक, आर्थिक, कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्र में दिन दुगनी रात चैगुनी उन्नति की है।
मेरठ जिले के 8 विकास खण्ड रजापुर, मुरादनगर, भोजपुर, हापुड, धौलाना, लोनी, सिम्भावली और गढ़मुक्तेश्वर तथा बुलन्दशहर के दो विकास खण्ड दादरी और बिसरख सहित कुल 10 विकास खण्डों के साथ जनपद अपने अस्तित्व में आया था। गाजियाबाद, दादरी, हापुड़ और गढमुक्तेश्वर इसकी पहली चार तहसीलें थीं। बाद में 30 सितम्बर 1989 को मोदीनगर को भी तहसील का दर्जा दे दिया गया। औद्योगिक विकास तथा कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर मई सन् 1997 में नोएडा को गौतमबुद्वनगर में समाहित कर दिया गया। जिससे गाजियाबाद में मात्र 8 विकास खण्ड शेष रह गये, जो गाजियाबाद नया जिला बनाते समय मेरठ से काटकर सम्मिलित किये गये थे। गाजियाबाद जिले की दादरी तहसील भी जनपद गौतमबुद्वनगर में सम्मिलित कर ली गई जिससे यहां मात्र 4 तहसीलें गाजियाबाद, मोदीनगर, हापुड और गढमुक्तेश्वर रह गई थीं, किन्तु 27 सितम्बर, 2011 को नवसृजित जनपद हापुड़ का सृजन होने के कारण जनपद गाजियाबाद में दो तहसील गाजियाबाद व मोदीनगर तथा चार विकास खण्ड – रजापुर, मुरादनगर, भोजपुर, लोनी शेष रह गये थे किन्तु दिनांक 29 जनवरी 2014 को नयी तहसील लोनी का सृजन हुआ है जिस कारण अब जनपद गाजियाबाद में तीन तहसीलें गाजियाबाद, मोदीनगर एवं लोनी तथा चार विकास खण्ड – रजापुर, मुरादनगर, भोजपुर, लोनी हैं।